एच आई वी संक्रमितों ने गोपनीयता भंग करने के लगाए आरोप
रायपुर। छत्तीसगढ़ के एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों के संगठन सीजीएनपी+ (CGNP+) ने राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति (CGSACS) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि विहान सीएससी परियोजना गैर-समुदाय के लोगों को दिए जाने के बाद एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की गोपनीयता प्रभावित हो रही है तथा उन्हें सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।
समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि पहले सरकारी योजनाओं और सेवाओं का संचालन एचआईवी समुदाय के माध्यम से किया जाता था, जिससे संक्रमित व्यक्तियों की पहचान गोपनीय बनी रहती थी। उनका आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी गई है, जिन्हें एचआईवी संक्रमण की संवेदनशीलता और सामाजिक पहलुओं की पर्याप्त समझ नहीं है।
समुदाय ने आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में एचआईवी संक्रमित महिलाओं को गलत तरीके से वेश्यावृत्ति से जोड़कर देखा जा रहा है तथा संक्रमित पुरुषों को भी उनकी यौन पहचान के आधार पर अनुचित रूप से चिन्हित किया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे समाज में भेदभाव और कलंक बढ़ रहा है।
प्रतिनिधियों का यह भी आरोप है कि गैर-समुदाय के लोग एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों के घर पहुंचकर उनकी बीमारी की जानकारी सार्वजनिक कर रहे हैं, जिससे उनकी गोपनीयता भंग हो रही है। समुदाय का कहना है कि कई मामलों में कॉलोनी और मोहल्लों में लोगों से पूछताछ कर एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति से शिकायत किए जाने के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
समुदाय ने यह भी सवाल उठाया है कि एआरटी (ART) केंद्रों में सुरक्षित रखी जाने वाली संक्रमित व्यक्तियों की गोपनीय जानकारी गैर-अधिकृत लोगों तक कैसे पहुंच रही है। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
इसके अलावा, समुदाय ने आरोप लगाया कि कई अस्पतालों में एचआईवी संक्रमित मरीजों को डायलिसिस और वेंटिलेटर जैसी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं देने में भेदभाव किया जाता है। उनका कहना है कि इस कारण कई मरीजों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सीजीएनपी+ ने राज्य सरकार से मांग की है कि विहान सीएससी परियोजना का संचालन पुनः एचआईवी समुदाय के प्रतिनिधियों को सौंपा जाए, ताकि संक्रमित व्यक्तियों की गोपनीयता, सम्मान और अधिकार सुरक्षित रह सकें।
समुदाय ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वे एआरटी की दी जाने वाली दवा का सेवन बंद कर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे तथा अपनी पहचान सार्वजनिक कर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
