महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप घोटाले के मुख्य आरोपियों में शामिल और लंबे समय से फरार चल रहे सौरभ चंद्राकर को ओमान में गिरफ्तार कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि उसने कथित तौर पर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश किया था। इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने यह कार्रवाई की।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर पिछले कुछ समय से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रह रहा था। गिरफ्तारी के बाद भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलहाल उसे ओमान की राजधानी मस्कट स्थित अल खौद हाई-सिक्योरिटी डिटेंशन सेंटर में रखा गया है।
5,000 करोड़ रुपये के घोटाले का मास्टरमाइंड
छत्तीसगढ़ के भिलाई निवासी सौरभ चंद्राकर पर करीब 5,000 करोड़ रुपये के महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं, अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्त होने का आरोप है। वह वर्ष 2019 से जांच एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर था।
फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला दर्ज
ओमान में सौरभ चंद्राकर के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और अवैध रूप से देश में प्रवेश करने का मामला दर्ज किया गया है। कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए उसने मस्कट में वकीलों की एक टीम भी नियुक्त की है।
महादेव ऑनलाइन बेटिंग मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रहे हैं। जांच एजेंसियां अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और हजारों करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जांच में जुटी हैं।
इंटरपोल की CCF ने खारिज की थी याचिका
हाल ही में इंटरपोल की CCF ने सौरभ चंद्राकर की उस याचिका को भी खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस को रद्द करने की मांग की थी। चंद्राकर का दावा था कि भारत में उसके खिलाफ राजनीतिक कारणों से कार्रवाई की जा रही है, लेकिन आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। CCF ने स्पष्ट किया कि मामला वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, इसलिए रेड नोटिस प्रभावी रहेगा।
अब सभी की नजरें ओमान की अदालत में चल रही कानूनी प्रक्रिया और भारत को सौरभ चंद्राकर के संभावित प्रत्यर्पण पर टिकी हैं। यदि प्रत्यर्पण होता है, तो महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप घोटाले की जांच में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।