अतिथि व्याख्याताओं ने सरकार के सामने रखीं प्रमुख मांगें, ₹50 हजार मानदेय व सेवा सुरक्षा की मांग
PSC भर्ती में बोनस अंक और आयु सीमा में छूट देने का आग्रह, 1 अगस्त से पहले नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की मांग
रायपुर। प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि व्याख्याताओं ने राज्य सरकार के समक्ष सम्मानजनक मानदेय, सेवा सुरक्षा और नियमित नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी कई प्रमुख मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि वर्षों से उच्च शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी होने के बावजूद उन्हें अब तक पर्याप्त आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं हो सकी है।
छत्तीसगढ़ अतिथि व्याख्याता पीएचडी, नेट ,सेट कल्याण संघ की अध्यक्ष कंचन गिलहरे ने एक प्रेसवार्ता में पत्रकारों से चर्चा कर बताया कि अतिथि व्याख्याताओं ने सरकार सेनयी वेतन नीति में बदलाव कर समान वेतन की मांग की है कि वर्तमान दैनिक मानदेय व्यवस्था समाप्त कर उन्हें ₹50 हजार प्रतिमाह एकमुश्त मानदेय दिया जाए, ताकि वे सम्मानजनक जीवन-यापन कर सकें। साथ ही महिला अतिथि व्याख्याताओं को छह माह का मातृत्व अवकाश तथा सभी अतिथि व्याख्याताओं को 65 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा प्रदान करने की मांग की गई है।
उन्होंने यह भी मांग की है कि PSC सहायक प्राध्यापक भर्ती में लंबे समय से अध्यापन कर रहे अनुभवी अतिथि व्याख्याताओं को उनके अनुभव के आधार पर 15 से 20 बोनस अंक दिए जाएं। नियमित भर्तियों में हुई देरी को देखते हुए अतिथि व्याख्याताओं के लिए आयु सीमा में विशेष छूट देने का भी आग्रह किया गया है।
अतिथि व्याख्याताओं ने नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए कहा कि 1 अगस्त से पहले प्रदेश के सभी शासकीय महाविद्यालयों में एक समान प्रक्रिया के तहत नियुक्तियां पूरी की जाएं, ताकि नए शैक्षणिक सत्र में पढ़ाई प्रभावित न हो।
उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि सेवा सुरक्षा, सम्मानजनक मानदेय, मातृत्व अवकाश, बोनस अंक और आयु सीमा में छूट जैसी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर उच्च शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए। संघ ने मांगे पूरी न होने की स्थिति में बड़े आंदोलन करने के साथ ही कानूनी लड़ाई का ऐलान भी किया ।